डॉक्टर अत्रि एक अलग ही प्रकार के शिक्षक थे हम सब के लिये
जासूसी नॉवेल के शौक़ीन नए प्रयोगों में विश्वास रखने वाले साथ ही अपने सभी छात्रों को कभी भी बोर नहीं होने दे सकते थी
सिगार और कार के कितने शौक़ीन थे किसी से छुपा नहीं होगा
एक गुण और था उनका जो कम ही लोग जानते होंगे उनको हिंदी भाषा बहुत प्रिय थी सो मेरा भी शौक था
इमेरजेंसी एक ऐसी जगह थी जहाँ शाम को हर विभाग के चिकित्सक और मित्र पहुँचते थे और मैं वहीं कार्यरत था तो सभी से मिलना हो जाता था ये बात अलग है कुछ मित्र डॉक्टर अत्रि के। हिंदी शौक से परेशान हो जाते थे
एक दिन डा अत्रि इमेरजेंसी में किसी रोगी को देखने आए अपने पी जी को बोले अब जो भी मरीज उनकी यूनिट में भर्ती होगा उसकी डाइग्नोसिस (बीमारी का नाम) अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी लिखना होगा
ये आदेश इमेरजेंसी में कार्यरत होने के कारण मुझे भी पालन करने थे
रोज बैठ कर माथा फोड़ी करते और हिंदी में डाइग्नोसिस लिखते
आपको केवल हिंदी में लिखी डाइग्नोसिस अगर बता भी दूंगा तो शायद मुश्किल होगी बीमारी समझने में बहुत सोचा समझी व् आपसी विचार विमर्श के बाद डाइग्नोसिस कुछ यूँ हुआ करतीं थीं
आकस्मिक शीर्षाघात
आकस्मिक क्षुद्रानत्रावरोध
वेर्मिका शोथ
फुफ़्फुस शोथ
पित्ताशय अश्मरी
अग्नाशय शोथ
अमाशय व्रण
यकृत शोथ
मलाशय अर्बुद
आदि आदि
मैं तब भी कुछ लिख लेता था मगर उनके पी जी रोते और झुंझलाते हिंदी न लिखें तो डांट खाते
काफी समय तक यूँ ही चलता रहा
एज दिन एक रोगी आया उसकी बीमारी की हिंदी मुझे भी समझ नहीं आ रही थी
अपने ज्ञानी मित्र राकेश शर्मा से पूछा (वो हिंदी का महारथी था) भाई ये पथरी यानि स्टोन और जॉन्डिस यानि पीलिया को हिंदी में क्या कहते है
ज्ञान प्राप्त होते ही बना डाली डाइग्नोसिस और जान में जान आई
शाम को भरी पूरी यूनिट के साथ अत्रि साहेब पधारे हिंदी में डाइग्नोसिस पूछी तो सबकी सिट्टी पिट्टी गुम
मुझे पता ही था मेरी पेशी निश्चित है
ऐसा ही हुआ हुक्म हुआ नागर को बुलाया जाये
हाजिर हुए तो वही सवाल जिसकी आशंका थी नागर इस रोगी की बीमारी का नाम हिंदी में बताओ
बिना रुके बिना कोई झिझक मैं बोला सर इसकी बीमारी का नाम है
"पित्त वाहिका अश्मरी
अवरोध जनित कामला"
क्या क्या वो बोले तो मैं भी बोला
पित्त वाहिका अश्मरी अवरोध जनित कामला
अत्रि साहिब बोले कविता मत कर बीमारी का हिंदी नाम बता
मैंने फिर दोहरा दिया वो सब के सर के ऊपर से गया बोले धीरे धीरे बोल और समझा इन सब गधों को
तब तक मैं समझ ही चूका था अत्रि साहिब खुद भी संशय में हैं लेकिन आदेश पालन होना था तो समझाया
पित्त वाहिका याने bile duct अश्मरी माने पथरी अवरोध याने रूकावट से जनित कामला अर्थात पीलिया
अर्थात ऐसा पीलिया जो पित्त की नली में रूकावट से पैदा हुआ हो
मतलब जिसे मेडिकल भाषा में कहेंगे
Obstructive jaundice
मतलब बताते ही अत्रि सर बोले नागर तूने बहुत मेहनत की है हिंदी के लिये
शाबास इसलिये अब तुझे आगे हिंदी में डाइग्नोसिस लिखने की जरूरत नहीं है
ये सब गधे आगे से हिंदी में लिखेंगे और समझ न आये तो नागर से पूछेंगे
उस दिन के बाद मेरी जान तो छूटी पर राउंड के बाद मेरे उन मित्रों ने मेरी बहुत धुलाई करी कि साले कहाँ फंसा दिया
राकेश की उस सहायता को आज भी याद करता हूँ
अत्रि साहिब को तो कोई कैसे भूल सकता है
भले ही आज वो इस दुनिया में न हों हमारे दिलों में तो हमेशा ही रहेंगे
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