Latest News

Thursday, August 24, 2017

स्मारिका,कॉलेज की बदमाशियाँ..

.

यूँ तो सभी गुरुजन सम्माननीय व् एक से बढ़कर एक थे लेकिन आज तीन  गुरुओं का  नाम विशेष रूप से लेना चाहूंगा

पहले एनाटोमी विभाग के डा0 के के बिसारिया सर(के जी  ऍम सी)  वास्तव में कमाल के शिक्षक थे एनाटोमी जैसे सूखे विषय को इस तरह पढ़ना कि कोई ध्यान हटा ही न सके उसी में खो जाना,वास्तव में एक सादे कपडे से मांसपेशी व् रंगीन चाक से शिरा,धमनी और नर्व सामने रख देना,मैंने ऐसा जादू कभी देखा नहीं,मजाल है कोई उनकी क्लास मिस करने की सोच भी सके

दूसरी शिक्षिका डा0 रति खंबाटा सच ही  कहती थी पुरुष छात्रों को...

"इस देश में स्त्री रोग के इलाज व् डिलीवरी कराने का कम ही अवसर मिलेगा तुंम्हे इसलिये एक तो बेसिक तरीका सीख ही लो डिलीवरी का"

सच कहा उन्होंने देश में महिलाएं पुरुष चिकित्सकों को ये मौका कम ही देती हैं

उस एक ही गुरुमंत्र से न केवल अनेक डिलीवरी कराई बल्कि एक बार तो फंसी गर्भनाल भी निकाली इमेरजेंसी परिस्थितियों में उन रोगियों की जान बचाने के लिये

और
यकीन मानिये उन  किसी भी महिला ने मुझे न केवल मौका ही दिया  वरन चिकित्सक के सम्मान में कोई कमी कभी नहीं की

तीसरे थे हमारे एनाटोमी विभाग के ही अध्यक्ष डॉ0 एस के सक्सेना सर कद के छोटे मगर दिल के हजारों से बड़े सभी से प्यार करने वाले सभी से प्यार पाने वाले

इन्ही डा0 सक्सेना का नियम था सभी एनाटोमी का सेमिनार प्रस्तुत करेंगे,उस क्लास में जो भी प्रश्न उत्तर होंगे उसके आधार पर ही फाइनल का परिणाम बनेगा दुर्भाग्य से कोई परीक्षा के दिन कुछ न बता सका मगर उसके साल भर के प्रश्नोत्तर उत्तम थे तो उनकी गारंटी थी वो उत्तीर्ण घोषित  होगा इसीलिये सभी उन सेमिनार की जी तोड़ तैयारी करते और प्रश्नोत्तरी में बढ़ चढ़कर भाग लेते

कुछ मेरे और मेरे जैसे उद्दंड मित्र भी थे जो पूछे जाने वाले प्रश्न पहले से ही होस्टल में तय कर लेते प्रश्न पूछा जाता,वक्ता थोड़ा उत्तर सोचने की एक्टिंग करता फिर सही जवाब पेश कर देता इस प्रकार दोनो का ही नक्शा जमता और पास होने के लिये रास्ता खुलता

एक बार की बात है नीरज गर्ग को थाइरोइड पर बोलना था पिछली शाम हमेशा की तरह तीन सवाल तैयार कर लिए जिन्हें पूछना था अगले दिन क्लास में ऐसा ही हुआ

पहला प्रश्न हुआ नीरज ने याद करने की एक्टिंग की सही जवाब...तालियां

कुछ और सवाल के बाद दूसरा सवाल फिर एक्टिंग व् नीरज का जवाब मगर ये क्या गलत जवाब पलट कर वही सवाल अपने पास,सही जवाब (वास्तव मे नीरज को गलत जवाब ही रटाया गया था ताकि उसका सही जवाब देकर अपना रौब जमाया जाये,इस बदमाशी का राज खुलते ही बाद में नीरज की कई लातें भी खाई हॉस्टल में )

मगर पिक्चर अभी बॉकी है दोस्त...

तीसरा सवाल.....जिसका कोई जवाब नहीं मिला सवाल ये था कि

"ये ग्रंथि थाइरोइड कहलाती ही क्यों है.???"

सारी क्लास सन्न जबरदस्त सन्नाटा,किसी के पास कोई उत्तर नहीं,एक एक कर छात्र खड़े हुए कोई जवाब नहीं

तीसरा टॉपर चुप,

दूसरा टॉपर निरुत्तर 

गुरु तो आखिर गुरु ही हैं समझ गए स्थिति को उत्तर अपने आप ही आये सो प्रथम टॉपर खड़ा ही नहीं किया और बोले...

इस सवाल का जवाब अब नागर ही देगा

मैं तैयार था उत्तर दिया तो बोले शाबास! क्लास की तालियों के बाद

बताओ पूरी क्लास को कहाँ पढ़ा ये उत्तर

सर लाइब्रेरी गया था एक जापानी जर्नल से जाना ये
शाबास!!

अभी से लाइब्रेरी जाकर जर्नल पढ़ते हो सारी क्लास को सीख दी गयी लाइब्रेरी जाने की

पूरा नक्शा जम चुका था उद्देश्य पूरा हो चूका था उस दिन का

ये बात अलग थी शाम को नीरज की लातें खाई

और उत्तर कहाँ से मिला उसका राज आज खोल देता हूँ

असल में मेरे पास एक बहुत प्रसिद्द डिक्सनरी थी अमेरिकन उस से ढूँढा ये उत्तर और नक्शा ज़माने को जापानी जर्नल बताया क्लास के सामने

इतनी बदमाशियां तो चलती ही हैं कॉलेज टाइम में
कालांतर में उस डिक्सनरी का पता अमरजीत को चल गया और हम सभी ने उस डिक्सनरी से बहुत कुछ सीखा
जबकि वो मेडिकल डिक्सनरी नहीं थी और आज भी मेरे सामने गुरु स्थान पर ही रखी है

ज्ञान जहाँ से भी मिले अच्छा ही है....

No comments:

Post a Comment

Pageviews past week