Latest News

Saturday, August 18, 2018

स्मारिका-क्या सोचा तुमने

--

ये बात 1981 की रही होगी मैं हड्डी विभाग में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में लीन था,जीवन में देवता स्वरुप लोग भी मिलते हैं उसका उदाहरण है ये घटना
अभी पी जी करते दस माह ही हुए थे थीसिस भी जमा नहीं हुई थी 14 माह बॉकी थे
मेरा चयन कमीशन के माध्यम से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के लिये हुआ और मुझे पौड़ी (उस समय उत्तराखंड नहीं होता था )
के जाने के लिए नियुक्ति पत्र मिला
मैं बहुत तनाव में था सेवा ही करनी थी लेकिन पी जी भी नहीं छोड़ सकता था क्या करूँ समझ नहीं पा रहा था
सरकारी नौकरी के अगला कमीशन कब बैठे कोई भरोसा नहीं होता सालों बीत जाते तो और भी तनाव था
खैर सोच विचार कर और हिम्मत करके अपने विभागाध्यक्ष डा0 डबराल साब को सारी व्यथा बताई
क्या चाहते हो.??
सर नौकरी न छूटे यही चाहता हूँ

हूँ क्या सोचा तुमने

सर ज्वाइन करके बिना तनखा वाली छुट्टी लेकर पी जी पूरी करूँगा

ठीक है जाओ मगर और किसी से चर्चा न करना ज्यादा दिन न रुकना
ओह्ह थैंक यू सर,(एक बाधा पार हुई)
इमेरजेंसी में ही मेरे साथ डा0 मेहता थे जो पी ऍम एस से थे मेरे बड़े शुभचिंतक थे
उनको पता चला तो एक गुरु मंत्र मिला
देखो महीने के अंत में जाना 2-4 दिन रूककर और उन चार दिनों का वेतन लेकर ही वापिस आना नहीं तो ज्वाइन नहीं माने जाओगे
ओह्ह धन्यवाद सर,गुरु मंत्र के लिये

नई और प्रथम पोस्टिंग,वो भी स्थाई कमीशन द्वारा सो मन फुला नहीं समा रहा था,बाधाएं दूर होती लगती थीं
पहुँच गए पौड़ी सन एंड स्नो होटल में
अगले दिन सी ऍम ओ ऑफिस
तुरन्त जॉइनिंग और पी एच सी इंचार्ज का पद
हमारे जैसे और भी नए रंगरूट थे ज्वाइन करने वाले
सबको सरकारी तंत्र से अवगत कराने और नौकरी के बारे में बताने के लिये सबकी मीटिंग थी सी ऍम ओ साब के साथ
सभी बातें बताकर अधिकारी बोले
ओ के जाइये अपनी सेवाएं ज्वाइन करिये शुभकामनाएं
ये कहकर वो साथ खड़े क्लर्क के साथ फाइलों में खो गए
सारा हाल खाली हो चुका था बस मैं वहीँ बैठा रहा
कुछ देर बाद नजऱ उठी सी ऍम ओ साब की
अरे तुम गए नहीं क्या बात है कोई परेशानी.??

सर कुछ बात करनी है आपसे

ओ के बोलो.??

नहीं सर बस आपसे....

ठीक है उन्होंने क्लर्क को बाहर जाने के आदेश दिए

अब बोलो.??

धीरे से सारी परिस्थितियां उनको समझाई और बोला सर आप ही मेरे अफसर,सीनियर,शुभचिंतक और अभिभवाक की जगह हैं आप से झूठ बोलकर ज्वाइन नहीं करूँगा ज्वाइन करके पी जी करने चला जाऊंगा मगर किसी को धोखा देकर नहीं
मेरी नौकरी आप के हाथ है सर,यदि ये सच जानकार आप आज्ञा देंगे तो ज्वाइन करूँगा अन्यथा वापिस चला जाऊंगा
ये कहकर उनका पोस्टिंग का लेटर मैंने उनके सामने रख दिया

कुछ देर वो सोचते रहे और फिर बोले जाओ अपना काम सँभालो

फरवरी के ठंडे आखिरी 4दिन पहाड़ी हवाओं का आनन्द लिया पहला वेतन प्राप्त किया और वापिस झाँसी मेडिकल कॉलेज में शांति से पी जी करने में व्यस्त हो गया
मन शांत व तनाव रहित था किसी को धोखा नहीं दिया और मेरी मंशा भी पूरी हो गयी थी
सब सामान्य चलता रहा
10 माह बाद अर्थात जब पी जी के मात्र 4 महीने बॉकी रह गए थे एक बेहद दुःखद समाचार अख़बार से पता चला उन सी ऍम ओ साब की जीप पहाड़ से नीचे गिर गयी और दुर्भाग्य से वो इस दुनिया से चले गए

इसके तुरन्त बाद सरकारी फर्रे आने लगे जिसमे नौकरी से निकाल देने की धमकियाँ होती थीं
सब को कूड़े में डाल पी जी पूरी कर वापस जा पहुंचा ज्वाइन करने पौड़ी
नए सी ऍम ओ साब ने ज्वाइन नहीं कराया बहुत तंग किया उनका क़िस्सा कभी बाद में
लेकिन उसी समय मैं सी ऍम ओ के दफ्तर में बड़े बाबू से मिला
उन्होंने एक बड़ा ही अजीब सा सवाल दागा

सर पुराने साब से आपका क्या रिश्ता था.??

नहीं कोई रिश्ता नहीं था

कई बार पूंछ कर वो हताश होकर बोला कोई बात नहीं सर आप नहीं बताना चाहते आपकी मर्जी अब तो साब भी नहीं रहे दुनिया में
मेरा माथा कुछ ठनका भाई ऐसा क्यों और किस आधार पर कह रहे हो.??

कुछ नहीं डा0 साब आप और आप जैसे बहुत डा0 ज्वाइन कर पहाड़ छोड़ चले गए सबको सरकारी लेटर भेजे जाते चेतावनी भरे
मगर जैसे ही आप का लेटर सामने आता साब बहुत नाराज़ होते और मुझे बोलते इस फाइल को कहीं नीचे रख दे,उनकी डाँट भी खाता मैं
अब आप रिश्ता बताना नहीं चाहते ये आपकी मर्जी
ये सुनते ही मेरी आँखें आसुंओ से भर गयी मेरा गला रुंध गया सारा माजरा मुझे समझ आ गया
रुंधे गले से बस उसे इतना ही कह पाया बड़े बाबू अब समझा,किन्तु इस रिश्ते को न तो तुम समझ पाओगे न ही अब मैं समझा सकूँगा
सार ये कि जीवन में देवता तुल्य लोग से भी ईश्वर भेंट कराता है
वो 15 मिनट की मेरी उनसे पहली और अंतिम भेंट थी,मेरे सच कहने पर सारा दोष उन्होंने अपने ऊपर लेकर मुझे अपने जिन्दा रहते कभी भी सरकारी पत्र भेजने नहीं दिया
मैं उनका पूरा नाम भी कभी नहीं जान पाया हाँ बाद में पता चला वो डा0 एल आर वर्मा साब थे,जिनकी याद में पौड़ी में क्रिकेट प्रतियोगिता रखी जाती रही

आज वो स्वर्ग में होंगे,याद करता हूँ तो मेरी आँखें आज भी भीग जाती हैं ये स्मारिका लिखते हुए भी आँख नम हो चली हैं

क्या आप बता सकते हैं मेरा उनसे क्या रिश्ता था.??????

....(अनमोल यादों के पिटारे से उदृत)

No comments:

Post a Comment

Pageviews past week