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Thursday, August 17, 2017

स्मारिका... किस्सा BHU का

ये उन दिनों की बात है जब हॉउस जॉब पूरा हो गया था किंतु हड्डी विभाग में पी जी न होने के कारण निठल्ले और मायूस थे और इधर उधर हाथ फेंक रहे थे कहीं भी किसी भी विषय में पी जी के लिये

इसी बीच BHU (बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ) में जाकर पी जी करने का विचार बना सो निकल पड़े राकेश शर्मा (मेरा परम मित्र एवं पी जी वाले रोग से पीड़ित ) के साथ बनारस के लिये
हम लोगों में परंपरा थी जिस शहर में भी किसी मित्र का घर था तो वो हमारा ही घर था उसके माता पिता भी हमारे माता पिता सामान थे आदि आदि किसी होटल वोटल में रुकने को सोचना नहीं पड़ता था
सो पहुँच गए बनारस की लंका (लंका .???जी हाँ ये बनारस के एक मोहल्ले का नाम है )
अपने सीनियर बॉस डा.राममूर्ती जी के घर डेरा डालने
वहीं पास में डा मितीन सिद्दीकी साहिब (दुसरे इमीडियेट सीनियर) की पैथ लेब भी थी
सिद्दीकी बॉस से क्षमा सहित बॉस "स" को ठीक बोल नहीं और स को "फ" बोलते थे जिसका आनंद सभी हॉस्टल में नक़ल करके लेते ही थे जैसे राकेश कहता

"फाले" रात बहुत हो गयी अब "फ़ो" जा"

ऐसे बहुत किस्से हैं वो कभी बाद में

BHU  पहुँच कर PSM की पी जी के लिये लिखित और मौखिक परीक्षा देनी थी लिखित परीक्षा हुई सामान्यतः वो प्रश्न ही याद रहते है जिनके सही उत्तर में शंका हो सो राकेश ने मुझ से मैंने उससे चर्चा की लगा साला सब गलत हो गया वाट लग गयी पी जी की

खैर ये सब पीछे रख चले वाईवा देने
राकेश का याद नहीं मेरा नं आया अभिवादन कर मैं परीक्षकों के सम्मुख था
औरों का तो ध्यान नहीं एक बुजुर्ग शायद विभागाध्यक्ष दूसरी एक चित्ताकर्षक सुंदर भद्र महिला शायद लेक्चरर
हड्डी का बंदा सुन बोले यदि हम दोनों में से एक गाड़ी चला रहा हो तो किसकी संभावना है ज्यादा एक्सीडेंट होने की और क्यों
सवाल सर पर हथौड़ी सा लगा सीधा उत्तर किसी किताब से पढ़ा नहीं लगता था बस दिमाग (?अगर था तो ) लगाकर जवाब बनाना था

मैं बोला बूढा आदमी की सम्भावना ज्यादा है एक्सीडेंट करने की प्रोफ़ेसर बोले क्यों

मैंने पक्ष रखा सर आयु के साथ नजर व् शरीर के रेफ्लेक्सेस कम पड़ते जाते हैं सामने देख निर्णय लेने और क्रिया करने में थोड़ा समय ज्यादा लगता है इसलिये

बस पकड़ा गया मैं वो शुरू हो गए ओह्ह आज समझ आ गया मैं कितना निकम्मा ड्राइवर हूँ अब तो कन्फर्म भी हो गया हड्डी का डा ही कह रहा है मेरे रिफ्लेक्स स्लो हो चुके हैं मैं सही निर्णय नहीं ले पाता या देर कर देता हूँ मेरा शरीर भी अब काबू में नहीं होता आदि आदि
तुरंत दिमाग ठनका ये क्या कह बैठा अब इसे संभालना भी होगा सो बोला
ऐसा नहीं सर वरिष्ठ ड्राइवर ये सब जानता है  इसीलिये पहले से ही अलर्ट रहता है वो गाडी धीमी गति से चलाता  है रैश ड्राइव नहीं करता अलर्ट रहने से समय से पूर्व ही अनुमान कर दुर्घटना से बचाता है

जल्दी ही एहसास हो गया ये कहकर मैंने दुसरी मुसीबत मोल ले ली है वो सुंदर नवयौवना तुरंत मधुर किन्तु सुन्न करने वाली वाणी में बोलीं

ओह्ह आज मुझे भी पता चला युवती होने के कारण मैं तेज और रैश ड्राइव करती हूँ अलर्ट रहती नहीं और ज्यादा एक्सीडेंट करती हूँ इस हड्डी के डा ने तो मेरी भी आँखें खोल दी

बस वाइवा यहीं तक सीमित था मैं कक्ष से पूरी तरह निराश बाहर आया

बाद में पता चला क़ि राकेश जी ने उस परीक्षा में प्रथम व् मैंने द्वितीय स्थान पाया और चार्ट भी बोर्ड पर लगा किन्तु  भाग्य को कुछ और ही मंजूर था दोनों में से किसी को भी पी जी में दाखिला इसलिये नहीं मिला कि मेरे देश के किसी काबिल नेता ने किसी और की सिफारिश की थी भले ही परिणाम निकल बोर्ड पर लगने के बाद

इसी क्रम में मैंने और राकेश ने विचार किया जब बनारस तक आए ही हैं तो डा तुली साहिब से जरूर मिलेंगे जो हड्डी के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सक हैं जिनके दर्शन पा लेना ही सौभाग्य माना जाता है
सो पहुँच गए उनके निवास पर पूछते पाछते

वहां एक ठिगना सा व्यक्ति टखनों तक मिटटी में सेना गार्डन में पानी दे रहा था उसको बोले
जाओ तुली सर को बोलो डा नागर आये हैं मिलने यही सोचकर कहा कि माली होगा
आवाज आयी बोलिये अरे तुली सर को बोलो भाई
वो बड़ी विनम्रता से मीठी आवाज में बोले जी कहिये मैं ही डा तुली हूँ
दिमाग घूम गया ये सुनते ही लगा कान गलत सुन रहे हैं थोड़ा होश आया तो मन किया ये मिटटी थोड़ी और गीली हो तो गर्दन तक छुपा लें मिटटी में

खैर माफी मांगी उनकी बेटी नीना तुली जो झाँसी मेडिकल में हमारी जूनियर छात्रा भी थी का हवाला भी दिया और अपनी व्यथा सुनाई और पी जी पाने के लिये प्रार्थना की

कुछ देर वो रुके अंदर आने का निमंत्रण दिया किन्तु हमारी हिम्मत अब रुकने तक की नहीं थी

उनके आशीर्वाद स्वरुप शब्द आज भी याद है जब उन्होंने कहा आप दोनों बहुत होनहार हो मैं तुमको अपने यहाँ पी जी तो नहीं दे सकता किन्तु मेरा विश्वास है एक दिन तुम दोनों एक बहुत अच्छे हड्डी विशेषज्ञ बनोगे

शायद उनके उस आशीर्वाद का ही परिणाम है कि वह राकेश शर्मा पर पूर्णतयः सत्य निकला

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