ये उन दिनों की बात है जब इंटर्नशिप समाप्त हो चुकी थी पूरी तरह डॉक्टर बन जाने का एक अलग सा ही ख़ुमार दिलों में छाया हुआ था आगे की पोस्टिंग में अभी समय था
दिसंबर मध्य के दिन थे अचानक ही रामनाथ (मेरा बैचमेट एवं परम मित्र ) से तय हुआ चलो शिमला घूम कर आते हैं
फिर क्या था हॉस्टल से कुछ कपडे समेट हाँ सभी उप्लब्धद्ध गर्म कपडे बैग में ठूंस चल निकले झाँसी से दिल्ली
दिल्ली पहुँच सीधे बस स्टॉप का रास्ता नापा अल्प आय वाले कंजूस इंटर्न ही थे सो काहे का होटल बस तय किया हुआ था कि सवेरे शिमला पहुँच कर दिन भर घूमेंगे खाए पिएंगे और रात्रि बस से वापस दिल्ली और रेल से झाँसी
खैर बस स्टॉप पहुंचे तो पता लगा कि दो रात्रि बस हैं एक 7 बजे रवाना होती है दूसरी 10 बजे रात्रि
सोचा 7 वाली से चलते हैं सवेरे 7 तक शिमला में होंगे सोचा क्या बस निकल ही लिये 7 वाली रात्रि बस से
बस यात्रा में हिचकौले खाते कब नींद आ गयी पता ही न चला मैं खिड़की की पास वाली सीट पर था और रामनाथ तीन वाली सीट पर मेरे साथ बीच में बैठा हुआ था बस ये ध्यान है चंडीगढ़ पहुँच कर पेट पूजा की और फिर सो गए सीट पर बैठे बैठे
रात्रि में ये पहली बार पर्वत यात्रा का अनुभव था सोलन से कुछ आगे जाकर जब बस गोल गोल घूम कर पहाड़ चढ़ने लगी तो निद्रा भंग हुए बस की लाइट में सामने नजर पड़ी तो होश उड़ गए सारी नींद गायब हो गयी क्योंकि मैं खड्ड की साइड बैठा था बस घुमते ही लगता अब गिरे खड्ड में बस अब गिरे खैर हिम्मत कर चुप रहने का ही निर्णय लिया
ऊपर जाते सर्दी बढ़ती जाती बस यही याद है कि जितने कपडे और स्वेटर बैग में ठूंसे हुए थे एक एक कर लादते रहे अपने ऊपर फिर न जाने कहाँ आँख लग गयी
आँख जब खुली जब एक बंदा यानि बस कंडक्टर कन्धा पकड़ कर हिला कर जगा रहा था बोला उतरो
मैं गहरी नींद में था झुंझला कर बोला अभी नहीं उतारना है शिमला जाना है
वो बोला उतरो शिमला आ गया है
घड़ी में समय देखा तो उस समय सवेरे के चार बज रहे थे बस में निगाह घुमाई तो वो पूरी खाली थी केवल हम दोनों के अलावा
मन मारकर उतारना ही था जैसे ही बस से उतरने की कोशिश की ठंडी बर्फीली हवा का झोंका आया बदन को सुन्न कर गया मन हुआ फिर से बस में ही घुस जाऊं मगर ऐसा संभव कहाँ था सारे पहने कपडे भी सर्दी से बचा नहीं पा रहे थे
बाहर बर्फ गिर रही थी किन्तु अँधेरा होने के कारण दिखाई नहीं दे रही थी
दोनों बाहर उतरे तो बस स्टॉप पर भी भरी सर्दी में बस हम दो ही उल्लू खड़े थे बाकी सभी यात्री शायद पहले ही जा चुके थे हमारे उतरते ही बस भी विदा हो गयी चौड़े में ठिठुरते हुए हम दो प्राणी खड़े थे
सामने छोटे से टिन शेड के बस स्टॉप पर एक बंदा ऊंची कुर्सी पर बैठा ऊँघ रहा था उसके सामने 2000 वाट के दो हीटर चालू थे जो हमें उस भीषण सर्दी में चिढ़ा रहे थे
अपनी गलती का एहसास हो चूका था कि कैल्कुलेशन गड़बड़ा गयी है दिल्ली से शिमला तक की इतनी चिकनी सड़क होने के कारण हम उम्मीद से पहले सवेरे 7 की जगह 4 बजे ही शिमला पहुँच गए
संकोच के साथ उस हीटर वाले बंदे के पास गए किसी होटल का पता जानने
वो बोला साहिब 4 बज रहे है बाहर बर्फ पड़ रही है कोई दरवाजा भी नहीं खोलेगा भूल जाओ
सुनते ही पैरों तले जमीन खिसक गयी
मरते क्या न करते उससे विनय की कि उसके बगल में जो सीट पडी हैं उन पर ही बैठने की इजाजत वो दे
वो ख़ुशी से तैयार हो गया हम दोनों जम गए हीटर के सामने वो राहत की गरमी आज भी अनुभव होती है
उस टीन के कमरे में इतनी जगह नहीं थी कि मेरा बैग भी आ सकता सो वो बाहर ही छोड़ना पड़ा मुझे याद है मैं बार बार उसे इस डर से देखने जाता कहीं चोरी न हो जाये तो इतनी देर में ही पेंट की मोहरी ठंडी बर्फीली होकर कष्ट देती थी
मेरी हरकत देख वो बोला कहाँ जाते हो मैंने कारण बताया तो जोर से हँसा बोला साहब इस सर्दी में जानवर भी नहीं निकलता आपका बैग कौन छेड़ेगा फिर यहाँ ऐसा होता भी नहीं है
हीटर की गर्मी में कुर्सी पर ही नींद आ गयी सवेरे 8 बजे नींद टूटी तो गर्म धूप निकलने लगी थी सारा शिमला सफ़ेद बर्फ की चादर से ढका कारों मकानो और पेड़ों पर भी बर्फ की सफेदी थी उसदिन 7 इंच बर्फ गिरी थी
सड़क पर बस चैन लगे मिलिट्री वाहन चलते नजर आ रहे थे
नज़ारे देख और नाश्ते के बाद बैग स्टॉप पर ही रखकर दोनों निकल पड़े शिमला दर्शन को
मुझे याद है ऊपर नीचे की सड़कों पर दो चक्कर लगाते ही और खिलती धूप में सारी सर्दी गायब पहने गर्म कपड़ों में से कुछ अब हाथ में आ चुके थे
इसी प्रकार आनंद लेते निगाह पडी केनेडी हॉउस पर लकड़ी की बनी ये बिल्डिंग मेडिकल डायरेक्टरेट की थी जिसके कुछ हिस्से में उन दिनों आग लग गयी थी
लालसा जागी रामनाथ से कहा चलते है और सर्विस के लिये कोशिश करते है हिमांचल प्रदेश में
वहां पहुंचे तो और सब के अलावा पाया कि एक 50 के पार आयु वाले सरदारजी इधर उधर आ जा रहे हैं मुझे लगा ये यहाँ बाबू होंगे सो
हमने उनको कहा हम हिमांचल में सर्विस करना चाहते हैं
ओह्ह वो बोले दस मिनट रुको अभी इंटरव्यू हो जायेगा हमने बताया अभी हमारे पास डाक्यूमेंट्स नहीं है बोलो कोई बात नहीं बाद में आ जायेंगे ये हमारे लिये सुखद आश्चर्य था
दस मिनट बाद वो हम दोनों को साथ ले एक कमरे में सामने बैठ इंटरव्यू लेने लगे अब मेरे भ्रम टूटा जिसे हमने बाबू समझा था वो अडिशनल डायरेक्टर थे
इंटरव्यू के बाद बोले थोड़ा रुको अभी नियुक्ति पत्र (Appointment letter) मिल जायेगा ये सुनकर तो हम दंग ही रह गए ये हमारी उम्मीद से परे था
थोड़ी देर में पता चला रामनाथ सलेक्ट हो गया मैं नहीं
बहुत बुरा लगा अहम पर ठेस लगी यारमेरे नं ज्यादा फिर मेरा सेलेक्शन क्यों नहीं
रहा नहीं गया पूछ ही लिया सरदार जी से कि क्या गलती हुई
वो बोले कोई गलती नहीं हुई तुम भूल गए मैंने जब पूछा आगे क्या करोगे तुमने कहा पी जी तुम्हारे नं अच्छे है तुम पहाड़ की नौकरी छोड़ कर भाग जाओगे इसलिये तुम्हे नौकरी नहीं
पहली बार पता चला अच्छी मेरिट भी एक अयोग्यता हो सकती है
खैर रामनाथ से मैं बोला यार अच्छा मौका है तेरे अस्पताल में कुछ दिन रहकर मौज करेंगे फ्री में रहने का इंतजाम हो गया है जब मन भर जायेगा तो भाग लेंगे
रामनाथ ने नियुक्ति पत्र थामा शाम तक शिमला का आनंद ले जा पहुंचे उसी बस स्टॉप पर
पहाड़ी क्षेत्रों का कोई आईडिया था नहीं
बस स्टॉप पर बोले दो टिकट देना रोहतांग पास के
कब जाना है साहिब
जितनी जल्दी हो सके जो भी पहली बस हो
तो साहिब छः महीने बाद आना
मजाक मत करो भाई नौकरी ज्वाइन करनी है
मजाक नहीं है सर अभी सर्दी है छः महीने बर्फ से रास्ते बंद रहते हैं छः महीने बाद गर्मियां आने पर खुलेंगे तब आना
उससे कुछ और सवाल जवाब कर रात्रि सेवा का दिल्ली का टिकेट ले बापिस लौट के बुद्दू झाँसी आये
वो मेरी पहली शिमला यात्रा थी
रामनाथ को भी ये घटना अच्छे से याद होगी उम्मीद है
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