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मैं उन दिनों बेहतर नौकरी की तलाश में था
इंटरव्यू के लिये कोल इंडिया संस्थान से काल मिली फॉर्म में अनुभव के लिये भी एक कॉलम था और पी जी के बाद एक साल का अनुभव जरूरी था मैंने उस कॉलम में प्राइवेट प्रैक्टिस भरा और कॉल आ गयी
इंटरव्यू प्रारंभ हो गया सवाल जवाब चल रहे थे लगभग आधा इंटरव्यू हो चूका तो संस्थान के पर्सनल विभाग वाला अचानक बोला रुकिये
हमने तो आपको केवल ये जानने के लिये बुलाया कि जान सकें आपका अनुभव क्या है
ये सुनते ही अंदर का गुस्सैल ब्राह्मण और आत्मसम्मान जिसे ठेस लगी थी जाग उठा
मैंने कहा ये ही आपकी और आपके संस्थान की समझ है क्या ये काम आप मात्र 25 पैसे के पोस्टकार्ड (उन दिनों पोस्ट कार्ड की यही कीमत थी) से कर सकते थे
आप जनता का पैसा उड़ा रहे हैं सारा ड्रामा ये जनता के पैसे पर मुझे जो आने जाने का खर्च वो भी जानता के पैसे से क्या आपका संस्थान ऐसे काम करता है.??
इतना ही नहीं मैं जो प्रैक्टिस करता हूँ उसका भी एक दिन की हानि की आपने जिसकी आपको कोई परवाह नहीं
यदि आपको अनुभव ही जानना था तो बॉकी सवाल क्या मेरा ज्ञान टेस्ट करने के लिये किये जा रहे थे.??
मैं तुरंत बोला मुझे काम नहीं करना ऐसे संस्थान के लोगों के साथ
इस उत्तर से अशानुसार वो सभी चौंक गए थे
मुझे भी लगा कि वो गेट आउट कहें मैं उठकर खड़ा हो गया और बोला लाइए मेरे सर्टिफिकेट जो उनके पास थे
इसी बीच उनके बीच जो डॉक्टर बैठे थे वो मुझे समझाने लगे बैठने का इशारा करने लगे लेकिन मैं अब तैयार नहीं था उनको चुनौती थी अपने अनुभव को सिद्ध करने की वो चुपचाप बैठे सुन रहे थे
तभी एक और चुनौती दी लगता है (डॉक्टर की ओर इशारा करते हुए) आपमें इनके अलावा कोई हड्डी का डॉक्टर नहीं है मैं दावे से कह सकता हूँ
वो बोले ऐसा क्यों कह रहे हो मेरा उत्तर था तुममे से जो भी हड्डी का डॉक्टर है वो अच्छी तरह जानता है कि देश का सबसे प्रसिद्ध हड्डी का डॉक्टर एक प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाला डॉक्टर है आपके जैसे किसी संस्थान का गुलाम नहीं
इसके बाद भी वो डॉक्टर मुझे रुकने को बोलते रहे और बाकी मूर्ख चुप थे
मैंने अपने पेपर वापस लिए और बाहर चला गया
आशानुरूप उस इंटरव्यू में मेरा चयन नहीं हुआ लेकिन पुनः इंटरव्यू हुआ जिसमें मेरा चयन हुआ और संस्थान के अनेक लोगों को पिछली घटना का ज्ञान था हेडक्वाटर कोलकाता तक ये घटना की जानकारी हो चुकी थी
फिर भी मेरा चयन अपने बेबाक विचारों के कारण हुआ
आज सोचता हूँ इतनी गर्मी नहीं होनी चाहिये खून में ..
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